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कलेक्टर न्यायालय ने प्रताड़ित करने वाले बेटे-बहू को घर खाली करने का दिया आदेश

 न्यूज़ इन्वेस्टीगेशन

जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कलेक्टर न्यायालय ने प्रताड़ना का शिकार हो रहे वृद्ध दंपत्ति की अपील स्वीकार करते हुए उनके बेटे और बहू को एक माह के भीतर मकान खाली करने का आदेश दिया है।

मामला गौरव दीप्ति मड़ई निवासी 64 वर्षीय श्रीमती उमा देवी और 65 वर्षीय श्री गया प्रसाद तिवारी से जुड़ा है। वृद्ध दंपत्ति ने रांझी तहसील में अपने छोटे बेटे रवि कुमार तिवारी और बहू अर्चना तिवारी के खिलाफ मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी गया प्रसाद तिवारी ने अपनी स्व-अर्जित आय और बैंक ऋण से मकान का निर्माण कराया था।

दंपत्ति का आरोप था कि बेटा और बहू मकान के लगभग छह कमरों पर जबरन ताला लगाकर कब्जा किए हुए हैं तथा उन्हें घर से निकालने की धमकियां देते हैं। लगातार प्रताड़ना के कारण उनका जीवन अत्यंत कष्टदायक हो गया था।
प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी रांझी ने दोनों पक्षों को शांतिपूर्वक रहने और विवाद न करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इससे संतुष्ट न होकर वृद्ध माता-पिता ने कलेक्टर न्यायालय में अपील दायर की।

सुनवाई के दौरान बेटे रवि कुमार तिवारी ने तर्क दिया कि उसने मकान के नवीनीकरण में धन खर्च किया है, इसलिए उसे बेदखल न किया जाए।

हालांकि न्यायालय ने पाया कि संपत्ति मुख्य रूप से माता-पिता द्वारा निर्मित है और पुत्र द्वारा किया गया सहयोग उसे माता-पिता को प्रताड़ित करने का अधिकार नहीं देता।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बुजुर्ग माता-पिता को जीवन के अंतिम पड़ाव में शांतिपूर्वक और सम्मानपूर्वक रहने का पूरा अधिकार है।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि बेटा सेना से सेवानिवृत्त है और पेंशन सहित अन्य साधनों से आत्मनिर्भर है, इसलिए उसे माता-पिता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया कि बेटा और बहू एक माह के भीतर मकान खाली कर अन्यत्र निवास सुनिश्चित करें।

न्यायालय ने बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक माह की मोहलत दी है। साथ ही इस अवधि में भी माता-पिता के सम्मान और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर न्यायालय ने तहसीलदार एवं थाना प्रभारी रांझी को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी जारी किए हैं।

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