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एसबीआई महिला अधिकारी की आत्महत्या के मामले में एसपी को दी शिकायत में तीन अधिकारीयों पर गम्भीर आरोप…

✒️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन

जबलपुर में भारतीय स्टेट बैंक की सहायक प्रबंधक श्रीमती आरती शर्मा की आत्महत्या के बाद मामला पुलिस अधीक्षक को दी गयी शिकायत के बाद चर्चा में आ गया है। मृतका के परिचित व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक और थाना सिविल लाइन को दी गई शिकायत में तत्कालीन डिप्टी मैनेजर अभय प्रसाद, डीजीएम हरिराम सिंह और सीएमएचआर प्रशांत सिंह पर आरोप लगाया है।

शिकायत में कहा गया है कि मृतका ने 29 मार्च 2025 को गरिमा पोर्टल पर मानसिक और लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इसकी जानकारी 21 अप्रैल को बैंक प्रबंधन को मिलने के बावजूद डीजीएम और सीएमएचआर ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शिकायत में दावा है कि शिकायत को जानबूझकर दबाया गया और आरोपी कर्मचारी को संरक्षण दिया गया, जिससे निराश होकर मृतका ने 26 अप्रैल को आत्महत्या कर ली। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले को दबाने के लिए 30 अप्रैल की बैकडेटेड नोटिंग बनाकर जांच को फर्जी रूप से पूरा दिखाया गया। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने एसपी से भारतीय न्याय संहिता की धारा 115, 61, 196, 74(2), 351 और 357 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है।

इस शिकायत को लेकर जब हमारी टीम ने इस मामले में एसबीआई मुख्यालय जाकर बैंक का पक्ष जानने की कोशिश की, तो डीजीएम हरिराम सिंह उपलब्ध नहीं थे, जबकि सीएमएचआर प्रशांत सिंह से मुलाकात हुई। उन्होंने कैमरे के सामने बयान देने से साफ इनकार करते हुए कहा कि “हम इस पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं।” शिकायत से जुड़े दस्तावेज दिखाने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्होंने कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।

बैकडेटेड नोटिंग के सवाल पर सीएमएचआर ने कहा कि “कमेटी ने फैसला पहले ही ले लिया था, एक्शन भी हो चुका था… बाद की बैठक केवल की गई थी” सीएमएचआर ने पहले तो यह बताया कि आरोपी डिप्टी मैनेजर और पीड़ित महिला के बीच आपसी मामला था जिसके चलते यह भी दावा किया कि महिला अधिकारी का ट्रांसफर इंदौर किया गया था। उन्होने यह भी कहा कि गरिमा पोर्टल में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। उनसे जब महिला द्वारा लिखित शिकायत देने की बात की गयी, तो सीएमएचआर ने कहा कि उनकी शिकायत को गरिमा पोर्टल पर की गई शिकायत मानकर बैंक की पीओआरएसएच कमेटी ने जांच कर ली थी। तथा आरोपी डिप्टी मैनेजर की वेतन वृद्धि रोकी गई थी। सीएमएचआर प्रशांत सिंह ने
इसे दोनों कर्मचारियों के बीच “आपसी मामला” बताया।

एसपी को की गई शिकायत में बैंक की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए सवाल उठाये गए हैं। जबकि बैंक की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि जांच पूरी हो चुकी थी और कोई चूक नहीं हुई, लेकिन एसबीआई के अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों का मीडिया के सवालों का जबाब न देना, गैर-पारदर्शी व्यवहार प्रदर्शित करता है।

वही जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के अनुसार मामले की शिकायत मिली है,जिस पर निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच मैं यदि कोई दोषी पाया जाता है तो विधि सम्मत कार्यवाही की जाएगी।

 

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