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आदिवासी जमीन मामले में पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी को राहत…गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Relief to journalist Ganga Pathak and his wife...Supreme Court stays arrest

✒️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन

नईदिल्ली मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल की थी, जिस पर न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेष और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।

जबलपुर के बहुचर्चित आदिवासी ज़मीन घोटाले में आरोपी बनाए गए गंगा पाठक और उनकी पत्नी की अग्रिम ज़मानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आरोपी फरार हैं और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को सुनने योग्य मानते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

आवेदक गंगा पाठक की तरफ से एडवोकेट मनीष क्षीरसागर एवं एडवोकेट रविशंकर यादव ने पैरवी की उन्होंने बताया कि कोर्ट में हमने दलील दी कि हम सिर्फ क्रेता हैं हमने रकम दी है, जिस समय हमने रजिस्ट्री कराई उस समय रेवेन्यू रिकार्ड में यह दिख रहा था कि ये सामान्य जाति की जमीन है, जब हम नामांतरण के लिए गए तब पता चला कि ये सामान्य की नहीं आदिवासी की जमीन है। इसके बाद आदिवासी ने शिकायत दी कि विक्रय पत्र शून्य किया जाए, आदिवासी ने कहा था शून्य घोषित किया जाए परन्तु एसडीएम ने अपने तरफ से एक अलग आदेश दे दिया कि विक्रेता क्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। हमारा कोर्ट से यह निवेदन है कि न तो हम प्रोपर्टी पर राहत मांग रहे, न हम क्लेम कर रहे कि वो हमारी जमीन है, न हमने दी हुई रकम की रिकवरी के सम्बंध में कोई केस लगाया, इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा आप तो केवल क्रेता हो, इसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी पर स्टे दे दिया।

हालांकि आदेश की कॉपी अभी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई है, लेकिन रजिस्ट्री ने पुष्टि की है कि गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि मामले में जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ठाकुर की जांच के बाद FIR क्रमांक 93/25 तिलवारा थाना FIR क्रमांक 120/25 बरगी थाना में गंगा पाठक, उनकी पत्नी और अन्य पर IPC की धाराएं 419, 420, 467, 468, 471 और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी को लेकर जबलपुर पुलिस ने सख्ती दिखाई थी। पुलिस ने उनके घर और संभावित ठिकानों पर दबिशें दीं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट से उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल गई।

पत्रकार गंगा पाठक ने दावा किया था, कि वे वर्षों से प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सरकारी जमीनों के अवैध कब्जों को उजागर करते आ रहे हैं। उन्हीं रिपोर्टों से नाराज़ अधिकारियों और रसूखदारों ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। उन्होंने कहा है कि यह पत्रकारिता पर हमला है।

सुप्रीम कोर्ट से पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी को राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रशासनिक जांच अब भी जारी है। उन्हें स्थायी राहत मिलेगी या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। अगली सुनवाई अगस्त माह में होगी।

 

Vilok Pathak

News Investigation “”The Real Truth Finder”

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