सर्व समाज की सहभागिता से वृहद वृक्षारोपण 20 जुलाई को

न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन
जबलपुर। भारतीय संस्कृति का मूल स्वर सामाजिक समरसता है और इसी समरसता के भाव को जागृत करने हमे पारंपरिक पर्वो को मिलकर मानना होगा, इसके लिए समरसता सेवा संगठन के द्वारा जिस तरह सभी समाजों को एक करके कार्यक्रम किए जा रहे है यह अनुकरणीय भी है और अभिनंदनीय भी है, उक्ताशय के उद्गार महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद महाराज ने समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित सर्व समाज की बैठक के अवसर पर समन्वय सेवा केंद्र छोटी लाइन फाटक में दिए।
समरसता सेवा संगठन द्वारा आगामी वृहद पौधारोपण एवं कजलियां महोत्सव की रूपरेखा हेतु सर्व समाज की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम के स्थान और स्वरूप पर समाज के प्रतिनिधियों से सुझाव दिए। सामाजिक प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव में कजलियां महोत्सव का आयोजन इस वर्ष पारंपरिक तर्ज पर हनुमानताल में मानने की बात की गई।
पूज्य स्वामी अखिलेश्वरानंद ने बैठक में आशीर्वचन देते हुए कहा हम समाज में विषमता नही चाहते हमारे भारत में विभिन्न जाति समाज भाषा के लोग विभिन्न क्षेत्रों में निवास करते है, और उन्ही के अनुसार पर्वो और त्योहारों को मनाते है और मैं हमेशा कहता हूं कि भारतीय संस्कृति का मूल स्वर सामाजिक समरसता है, चाहे सतयुग हो, त्रेता युग हो, द्वापर युग हो या आज जिस युग में हम है वह कलयुग हो हर युग में सामाजिक समरसता रही है, और इसी सामाजिक समरसता को मानते हुए हम कजलियां पर्व मानने के लिए आज हम एकत्र हुए है और मेरा मानना है किसी भी कार्यक्रम को सफल, सार्थक और प्रभावी बनाने के लिए चुनौतियों को स्वीकार करते हुए एक होकर कार्य करे तो निश्चित रूप से सफलता हमे मिलेगी।
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कहा समरसता सेवा संगठन आप सभी का अपना संगठन है, आपके सहयोग और मार्गदर्शन से आज संगठन ने जो गति और उंचाई तय की है उसमे आपकी उल्लखेनीय भूमिका रही है। समरसता सेवा संगठन के प्रारंभ से ही हमने एक मूल मंत्र समरस भारत से समर्थ भारत के निर्माण के लिए सब सबको जाने और सब सबको माने को चरितार्थ करने में आपका अतुलनीय योगदान है। समसरता सेवा संगठन ने अपने प्रारंभ से लेकर अभी तक 72 संगोष्ठियों के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण, समरसता के प्रमुख पर्व में होली और कजलियां महोत्सव के दो वर्षो में आयोजन किया गया।
जैन ने कहा आज की बैठक भी संगठन के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा हेतु आमंत्रित की गई है जिसमे पौधारोपण और कजलियां महोत्सव के संदर्भ में आपके सुझाव आमंत्रित किए गए थे, जिसमें अधिकतर लोगो ने कजलियां महोत्सव को हनुमानताल में मानने की बात कही है, इस पर संगठन विचार करेगा और शीघ्र ही निर्णय करेगा। साथ ही विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारे उत्तरदायित्व के लिए इस वर्ष आगामी 20 जुलाई को घुघरा लम्हेटा के समीप ही सर्व समाज की सहभागिता से वृहद पौधारोपण कार्यक्रम किया जायेगा।
बैठक का संचालन श्री धीरज अग्रवाल एवं आभार सचिव उज्ज्वल पचौरी ने व्यक्त किया।




