अपराधमध्यप्रदेश

सर्प के डसने से गयी भाई-बहन की जान…झाड़फूंक अंधविश्वास बना मौत का कारण

न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन

कटनी/ जिले में सगे भाई बहन को 3 बजे रात को सर्प ने काटा और परिजनों को जानकारी लगने के बाद , उन्हें बहोरीबंद के नाग मन्दिर में झाड़फूँक कराने लेकर गए, और आधे से ज्यादा समय इन्ही सब क्रियाओं में खराब कर दिए। जिसके बाद दोनों की हालत खराब होने पर तांत्रिक ने ही उन्हें अस्पताल जाने बोला।
स्लीमनाबाद थाना अंतर्गत ग्राम धरवारा में भाई-बहन की सर्पदंश से मौत हो गई। जो रात्रि में घर पर साथ सोये थे, जिनको रात्रि में करीब 3 बजे विजय कोल 17 वर्ष के पैर में सर्प ने काटा, फिर वहीं पर सो रही बड़ी बहन उर्मिला 22वर्ष पिता शिवकुमार कोल को भी सर्प ने काटा। जब परिजनों को इसकी जानकारी दोनो बच्चों ने दी तब परिजन उन्हें पहले झाड़फूंक के लिए बहोरीबंद के कुआं गाँव मे झाड़फूक कराने ले गए जिसमे अधिक समय बेकार हुआ, और जब यहां उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तब उन्हें स्लीमनाबाद स्वास्थ्य केंद्र में परिजन लेकर पहुँचे जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया इलाज के दौरान जिला अस्पताल में दोनो की मौत हो गई। जबकि सर्प को भी पकड़ रखा था। सर्पदंश के बाद झाड़फूंक का यह क्षेत्र में पहला मामला नहीं है जिले में सर्पदंश के कारण अधिकांश मौतों की वजह ग्रामीणों द्वारा पहले झाड़फूंक पर विश्वास करना, जिसके बाद इलाज कराने की मानसिकता बनी हुई है। जिससे सर्पदंश की घटनाओं के बाद मृत्यु बढ़ती है ।

➡️दो घण्टे के अंतराल पर मौत

ज्ञात जानकारी अनुसार दोनो को कुआं नाग मन्दिर में झाड़फूंक के बाद बिगड़ती हालत देख स्लीमनाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे लेकिन हालत गंभीर होने पर दोनों भाई बहन को जिला अस्पताल कटनी भेजा गया। जहां पर ईलाज के दौरान दोपहर करीब 1 बजे उर्मिला ने दम तोड़ा तो करीब दो घण्टे बाद विजय ने भी दम तोड़ दिया, वहीं इस घटना से परिजनों का हाल बेहाल है,और पूरा गांव गमगीन है। दोनो के शव गांव पहुंचते ही सारा गांव इकठ्ठा हो गया।

➡️जिंदगियों पर आस्था भारी

जबलपुर – कटनी सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में आज भी मेडिकल विज्ञान पर आस्था भारी है और झाड़फूंक के इरादे से ठीक करने के दावे वाले तांत्रिकों की वजह से लोग गुमराह होकर इनकी शरण मे जाते है तब तक समुचित इलाज मिल पाने का समय खत्म हो जाता और जब पीड़ितों की हालत बुरी हो जाती है तो खुद ही अस्पताल जाने बोलते हैं। लेकिन तब तक देर हो जाती है। जिसे सीधे तौर पर यह कहा जा सकता है जिंदगियों पर अब भी आस्था भारी, भले ही मृत्यु हो जाये।
➡️सर्प पकड़कर ले जाने का अंधविश्वास
कई मामलों में यह भी सुनने आया है कि जिसको सर्प काटता है यदि उसे भी जिंदा पकड़ कर ले जाओ तो तन्त्र विद्या से वह सर्प अपना जहर वापस खींच लेता है और मरीज ठीक हो जाता, इसी तरह शिवकुमार कोल के परिवार ने भी सर्प को पकड़ कैद कर रखा था। लेकिन इसका कोई भी चमत्कार नही हुआ, और अब जवान बेटे बेटी की मृत्यु से माता पिता बुरी तरह से टूट गए हैं , जो कि अभी तक इस तरह का चमत्कार कभी नही हो सका है फिर भी लोग इस तरह की भ्रामक भ्रांतियों को मन बैठाए हुए हैं।

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