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भारतीय दर्शन के वाहक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी

◆ The Narrative 

न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन / भारत भूमि ने ऐसे कई ऋषि-पुरुष दिए जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया. उन्हीं में से एक थे दत्तोपंत ठेंगड़ी जी.

विचार, संगठन और कर्म के प्रखर साधक, जिन्होंने संघ प्रचारक के रूप में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए भारत में श्रमिक, किसान और स्वदेशी विचारधारा को संगठित कर उसे जन आंदोलन का रूप दिया.

वे भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठनों के संस्थापक थे. उनके विचार में राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि जीवंत सांस्कृतिक चेतना है.

ठेंगड़ी जी ने पाश्चात्य पूंजीवाद और कम्युनिज़्म, दोनों के बीच भारतीय मार्ग की बात की, जो श्रम और संस्कार को साथ लेकर चलता है. उन्होंने संगठित श्रम को राष्ट्रशक्ति का स्तंभ बताया.

 

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