जबलपुर के जहांगीराबाद की साढ़े छह एकड़ जमीन के क्रय-विक्रय पर कोर्ट की अंतरिम रोक
Court's interim stay on the sale and purchase of six and a half acres of land in Jahangirabad

न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन
जबलपुर। शहर के हृदय स्थल में स्थित जहांगीराबाद की करीब साढ़े छह एकड़ बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने पर जिला न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने विवादित संपत्ति को बेचने, हस्तांतरित करने अथवा उस पर किसी प्रकार का भार सृजित करने से संबंधित सभी गतिविधियों पर रोक लगाते हुए नवाब जहांगीराबाद परिवार के वारिसों समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
वादी की ओर से अनुबंध के पालन के लिए प्रतिवादियों को विधिक नोटिस दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने प्रतिवादियों को विवादित संपत्ति के विक्रय, हस्तांतरण अथवा किसी प्रकार का भार सृजित करने से रोक दिया। यह अंतरिम आदेश छह माह या प्रकरण के अंतिम निराकरण, जो भी पहले हो, तक प्रभावी रहेगा।
जिला न्यायाधीश राहुल सिंह की अदालत में केवी डेवलपर्स विरुद्ध शाहबानो खानम एवं अन्य के मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया गया। विवादित भूमि तीन पत्ती चौक से यातायात थाने तक के क्षेत्र में स्थित बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये है।
मामले में गंगानगर, गढ़ा निवासी कालोनाइजर एवं बिल्डर विनय दुबे ने दावा किया है कि जहांगीराबाद निवासी शाहबानो खानम सहित अन्य के साथ पांच दिसंबर 2022 को संपत्ति के विकास एवं निर्माण के संबंध में लिखित अनुबंध हुआ था। अनुबंध के तहत उन्होंने प्रतिवादियों को करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया। निर्माण और विकास से संबंधित अन्य खर्च वहन करने की जिम्मेदारी भी वादी की थी , गढ़ा निवासी कालोनाइजर एवं बिल्डर विनय दुबे ने दावा किया है कि जहांगीराबाद निवासी शाहबानो खानम सहित अन्य के साथ पांच दिसंबर 2022 को संपत्ति के विकास एवं निर्माण के संबंध में लिखित अनुबंध हुआ था। अनुबंध के तहत उन्होंने प्रतिवादियों को करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया। निर्माण और विकास से संबंधित अन्य खर्च वहन करने की जिम्मेदारी भी वादी की थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि अनुबंध होने के बावजूद उसकी शर्तों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है और विवादित जमीन को अन्य पक्षों को बेचने अथवा सौदा करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही संबंधित पक्षों द्वारा उस पर अनावश्यक दबाव बनाए जाने का भी दावा किया गया है।
वादी की ओर से अधिवक्ता आशीष मिश्रा, राहुल यादव एवं शिवाजी सिंह ने पैरवी की।




