स्वयं के शासन में प्रदर्शन एवं विरोधी नारे कोई पहली बार नहीं लगे…. पर इस बार बात आखिर प्रभात भैया की जो थी
जो कार्य मिनटों में होना था...उसके लिए घंटों लग गए...

✍️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन
संस्कारधानी के बलदेव बाग चौराहे पर विगत रात्रि होने वाली वाहन चेकिंग के दौरान पूर्व महापौर एवं भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष प्रभात साहू के साथ विवाद के दौरान पुलिस द्वारा कथित मारपीट की गई। इसके बाद मौके पर पहुंचे सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रशासन विरोधी नारे लगाकर प्रदर्शन किया। और प्रदर्शन होता भी क्यों ना बात प्रभात भैया की जो थी भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष, पूर्व महापौर, पूर्व महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सहित अनेक सम्माननीय पदों में रहने वाले प्रभात साहू अपनी मिलन सरिता के लिए पहचाने जाते हैं। बीती रात जो प्रदर्शन हुआ उसमें कार्यकर्ताओं से ज्यादा उनके चाहने वाले पहुंचे। हालत यह थे कि उस प्रदर्शन में कांग्रेसी मित्र भी शामिल थे और वे किसी दलगत भावना से नहीं आए थे। बल्कि प्रभात साहू के व्यक्तिगत संबंधों के कारण पहुंचे थे इसी दौरान विधायक, सांसद सहित कई भाजपा के वरिष्ठ नेता घटना स्थल पर पहुंच गए थे।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि गुरुवार की रात बलदेवबाग चौराहे पर एक पुलिस वाले ने पूर्व महापौर तथा भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ नेता प्रभात साहू को वाहन चेकिंग के दौरान रोक लिया। प्रभात साहू ने अपना परिचय दिया लेकिन इसके बावजूद दोनों के बीच न सिर्फ आरोपित तौर पर कहा-सुनी और गाली गलौज हुई, बल्कि वायरलेस सेट वॉकी-टॉकी से पुलिस वाले ने पूर्व महापौर प्रभात साहू के सिर पर हमला भी कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के साथ हुई इस घटना के बाद न केवल भाजपा कार्यकर्ता बल्कि प्रभात साहू से जुड़े समर्थक जिनमें कांग्रेस नेता भी शामिल थे, वहां बड़ी संख्या में एकत्रित हो गये, जिन्होंने नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। बलदेवबाग से लेकर रानीताल तक, फिर रानीताल से मालवीय चौक तक और फिर प्रभात साहू के सुजी मोहल्ला स्थित निवास स्थल तक सांसद,विधायकों, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का जमावड़ा लग गया। आरोपी पुलिसकर्मी पर निलंबन तथा विभागीय जांच आदि तमाम कार्रवाई के बाद पुलिस और प्रभात साहू की बीच सुलह नहीं हो पाई। जिसका परिणाम यह हुआ देर रात लॉर्डगंज थाने में मुलाहजे के बाद एफआईआर की गई।
घटना स्थल पर जबलपुर सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अशोक रोहाणी समेत कांग्रेस के नेता भी मौके पर जा पहुंचे। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और आरोपी पुलिस कर्मी को वहां से चलता कर दिया गया। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। इसी दौरान विधायक अभिलाष पांडे प्रभात साहू को अपने दोपहिया वाहन में बैठाकर वहां से ले गए। इसके बाद समझौते और शांति के लिए प्रभात साहू के सुजी मोहल्ला स्थित आवास पर पुलिस अधीक्षक संपत लाल उपाध्याय तथा भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की बैठक सांसद आशीष दुबे की विशेष मौजूदगी में हुई। आरोपी पुलिसकर्मी को निलंबित करने तथा उसकी विभागीय जांच करने का आश्वासन पुलिस अधीक्षक द्वारा दिया गया।
प्रभात साहू इस निर्णय से सहमत नहीं हुए और उन्होंने सारे प्रस्तावों को नकार दिया। देर रात करीब 12:30 बजे प्रभात साहू लॉर्डगंज थाने पहुंचे,जहां से उन्हें मुलाहजा के लिए ले जाया गया। इसके बाद थाने में मामला पंजीबद्ध किया गया। बहरहाल जो भी हो परंतु चर्चाओं का दौर यह रहा की स्वयं की सत्ता में जो कार्य मिनटों में होना था,उसके लिए घंटों लग गए।
यह पहला मौका नहीं है जब अपनी ही सत्ता में रहते हुए भाजपा नेताओं को प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारे लगाना पड़े। इसके पूर्व में भी चाहे रांझी थाना हो या कोतवाली, पुलिस के खिलाफ धरना देना पड़ा था। पिछले दिनों कोतवाली में तो एक बिजली विभाग के अधिकारी के खिलाफ न केवल तीन विधायकों को बल्कि नगर अध्यक्ष, पूर्व नगर अध्यक्ष सहित मंडल अध्यक्षों और दिग्गजों को धरने पर बैठना पड़ा था। खुद की सत्ता होते हुए भी थाने के सामने जमीन पर धरना दिए नेताओं को देखकर पूरे संस्कारधानी में चर्चाओं का दौरा गर्म रहा। कमोबेश स्थिति ये है की भाजपा मे कार्यकर्ताओं सहित कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि ऐसा महसूस होता है कि संपूर्ण प्रशासनिक कार्यप्रणाली ऊपर से संचालित है जिसके कारण उनकी सुनवाई नहीं होती।
खैर छोड़ो अपने मुद्दे पर आते हैं… शहर में पुलिसिया व्यवहार को लेकर कई जगह शिकायत है। जहां एक तरफ बात कम्युनिटी पुलिसिंग की होती है एवं उच्च अधिकारी जनता में पुलिस की छवि सुधारने में लगे हैं, वहीं उनके मातहत अधिकारियों की मेहनत में पलीता लगा रहे हैं। शहर में आम जनता के साथ थाने में क्या व्यवहार होता है किस तरीके की बातचीत की जाती है यह बात उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आना जरूरी है। आम व्यक्ति सुरक्षा की भावनाओं को लेकर पुलिस के पास जाता है परंतु उसे न केवल टाला जाता है, बल्कि पुलिसिया भय भी दिखाया जाता है। पिछले दिनों ओमती थाने में हुई लूट की वारदात को बहुत आसानी से पचा लिया गया। इसी तरह एडिशनल एसपी के बंगले के सामने युवक युवती पर हुए गंभीर हमले के आरोपी भी आज महीनॉ बीतने के बाद भी पकड़ से बाहर हैं। जबकि पीड़ित स्पष्ट वीडियो फुटेज स्वयं लेकर पुलिस को दे चुके हैं। ऐसे अनेकों उदाहरण है। वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वे कसावट लाते हुए निचले स्तर पर नजर अवश्य रखें। क्योंकि जिस तरह से पुलिस की छवि जनता में धूमिल हो रही है उससे जनता का ही घाटा है। क्योंकि आने वाले समय में वह असुरक्षित हो जाएगी और अपराधियों को मौका मिल जाएगा।
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