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घिरौली कोल माइन प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ों की कटाई के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई अब 6 जनवरी को

✒️विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन

सिंगरौली में अडानी ग्रुप के घिरौली कोल माइन प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ों की कटाई के मामले में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में
17 दिसंबर को हुई सुनवाई में यह तथ्य उजागर हुआ कि इस मामले में एक जनहित याचिका पहले से ही सिंगरौली की बैढ़न जनपद पंचायत अध्यक्ष सविता सिंह द्वारा जनहित याचिका दायर की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता ब्रह्मानंद पाठक ने कोर्ट के सामने तथ्यों के माध्यम से बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अडानी ग्रुप के कोल माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए 6 लाख पेड़ों की कटाई हो रही है। अधिवक्ता के अनुसार जिस क्षेत्र में कटाई हो रही है, वहां आम नागरिकों और मीडिया की एंट्री नहीं है। इससे यह जानना भी लगभग असंभव हो गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वास्तविक स्थिति क्या है।

कोर्ट ने इसे गंभीर विषय मानते हुए जनहित याचिका को मुख्य याचिका से जोड़ दिया। जिसको देखते हुए स्वतः संज्ञान मामले में हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता मोहित वर्मा ने अपना आवेदन वापस ले लिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता सविता सिंह को सुझाव दिया कि यदि आदेश के बावजूद कटाई हो रही है, तो वे निगरानी करें और अवमानना याचिका दायर करें। इस याचिका में अदानी के स्टारटेक मिनरल रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि सिंगरौली में पेड़ कटाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वतः संज्ञान की याचिका पर भी सुनवाई की। सरकार ने बताया कि ट्रांसप्लांट किए जा रहे पेड़ों की जियो टैगिंग की जा रही है। पेड़ लगाने वाली जगहों की जानकारी भी कोर्ट को दी गई। जब कोर्ट ने नई जगहों को देखा, तो सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि पेड़ लगाने वाली जगहों पर पहले से ही घना जंगल है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में सरकार से यह जवाब तलब किया कि कितनी जगहों पर पेड़ कटाई की अनुमति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि सिंगरौली के घिरौली कोल ब्लॉक में कई हजार हेक्टेयर वन भूमि डायवर्ट की जा रही है। जहां 5.7 से 6 लाख पेड़ काटे जाने का प्रस्ताव है। करीब 620 परिवारों के विस्थापन की स्थिति बन रही है। इस परियोजना को लेकर आदिवासी विरोध, पुलिस बंदोबस्त, धारा 144 और विधानसभा में वॉकआउट तक हो चुका है। अब जब यह मामला सीधे हाईकोर्ट की सख्त निगरानी में आ चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी को तय की गई है।

 

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