7 किलो सोना,62 किलो चांदी जब्त करते हुए जबलपुर सहित अहमदाबाद, पुणे, जयपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई,
ED takes major action in Jabalpur, Ahmedabad, Pune, Jaipur, seizing 7 kg gold, 62 kg silver
✒️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन
जबलपुर, प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) ने एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह अमेरिकी बैंकों का प्रतिनिधि बनकर अमेरिका के नागरिकों को लोन ऑफर करता था। ठगी की रकम अमेरिका से क्रिप्टो में भारत लाकर रियल एस्टेट में लगाई जाती थी। ईडी ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में अहमदाबाद, जयपुर, जबलपुर और पुणे में छापेमारी की गई। यह कार्रवाई मैग्नेटल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी नामक फर्जी कंसल्टेंसी कंपनी के खिलाफ की गई। यह कंपनी अमेरिका के नागरिकों को नकली ऋण योजनाओं में फंसाकर लाखों डॉलर की ठगी कर रही थी। ईडी की छापेमारी पुणे साइबर पुलिस की प्राथमिकी पर आधारित थी, जिसमें 8 लोगों को आरोपी बनाया गया।
ये कहना अब सही होगा कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों का नेटवर्क अब छोटे शहरों तक फैल चुका है। जबलपुर में भी ईडी की टीम ने एक प्रमुख ठिकाने पर दबिश दी। यहां डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की गई। यह पहली बार है जब अमेरिका के नागरिकों से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामले में जबलपुर को जांच के दायरे में लाया गया है। ईडी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद, जयपुर, जबलपुर और पुणे में की गई कार्रवाई में ईडी को अवैध संपत्ति और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। तलाशी में 7 किलो सोना, 62 किलो चांदी, 1.18 करोड़ रुपए नकद और 9.2 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए। कॉल सेंटर से संबंधित फर्जीवाड़े के डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं। ईडी ने मैग्नेटल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी के दो साझेदार संजय मोरे और अजीत सोनी को जयपुर से गिरफ्तार किया है। दोनों पर मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी नागरिकों के साथ साइबर ठगी के गंभीर आरोप हैं। एजेंसी के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि मैग्नेटल बीपीएस का कॉल सेंटर पुणे की प्राइड आइकॉन बिल्डिंग की 9वीं मंजिल से संचालित हो रहा था। आरोपित खुद को अमेरिकी बैंकों का प्रतिनिधि बताकर नागरिकों को लोन ऑफर करते थे। फिर उनका बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा हासिल कर लेते थे। इन जानकारियों के आधार पर अमेरिका में बैंक खाते खाली किए जाते थे।
ईडी ने जांच में पाया है कि ठगी से कमाई गई राशि का एक हिस्सा सॉफ्टवेयर खरीदने और ऑफिस का किराया देने में उपयोग हुआ। जबकि बड़ा हिस्सा सोने, चांदी, महंगे वाहन, निजी संपत्तियों और रियल एस्टेट में निवेश कर छुपाया गया। जांच एजेंसी को यह भी पता चला कि नकद धनराशि का बड़ा हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए प्रसारित किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच से यह खुलासा हुआ है कि धोखाधड़ी से अर्जित रकम को अमेरिका में मौजूद साथियों के जरिए यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इस रकम को ट्रस्ट वॉलेट, एक्सोडस वॉलेट जैसे डिजिटल वॉलेट्स में स्टोर किया जाता और फिर पारंपरिक अंगड़िया चैनल के माध्यम से नकद रुप में भारत लाकर अहमदाबाद में बदल दिया जाता था। जांच एजेंसी की कार्रवाई से साइबर ठगों में हड़कंप मच गया है। इस नेटवर्क से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।
Vilok Pathak
News Investigation “The Real Truth Finder”
न्यूज़ इन्वेस्टीगेशन “वास्तविक सत्यान्वेषी”




