महापुरुषों के जीवन एक अंश को भी आत्मसात कर लें, तो समाज के साथ स्वयं की उन्नति संभव : विचार गोष्ठी में बोले वक्ता
If we imbibe even a part of the lives of great men, then progress of self along with society is possible: Speaker said in the seminar

✒️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन
जबलपुर, कोई भी समाज जब तक महापुरुषों को अपनी जाति बिरादरी से ऊपर उठकर नहीं देखेंगे तब तक ना मानव की उन्नति सम्भव है और न ही समाज की उन्नति सम्भव है। वीरों और महापुरुषों के जीवन को पढ़ना सम्भव न हो तो सिर्फ उनके जीवन के किसी अंश को अपने जीवन में उतार ले तो आपका जीवन सफल हो जाये, यह बात चिंतक, विचारक कवि अभिनेष अटल ने समरसता सेवा संगठन द्वारा वीर दुर्गादास राठौर, भगवान बलराम, रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में आयोजित विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए अग्रवाल धर्मशाला, ग्वारीघाट में कही।
समरसता सेवा संगठन द्वारा वीर दुर्गादास राठौर, भगवान बलराम, रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी नारायण संस्थान नागपुर के पूज्य स्वामी मुनि दर्शन के , मुख्य वक्ता चिंतक विचारक कवि अनिमेष अटल, विशिष्ट अतिथि पूज्य स्वामी हरिदास जी, ज्ञानगंगा कॉलेज के डायरेक्टर पंकज गोयल एवं समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, सचिव उज्जवल पचौरी की उपस्थिति में विचार गोष्टी का आयोजन किया गया। विचार गोष्टी के पश्चात संस्कारधानी क़ज़ालिया महोत्सव में सहयोग करने हेतु विभिन्न समाजो के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया।
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने स्वागत उद्बोधन और कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा समरसता सेवा संगठन के आह्वान पर सर्व समाज के लोगो ने अपनी सहभागिता से कार्यक्रमों को सफल बनाया और आप सभी के सहयोग से ही विगत दिनों संपन्न कजलिया महोत्सव का सफल आयोजन में हजारों लोगो ने भागीदारी की। जैन ने कहा हमारी सनातन परम्परा में कहा जाता है धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो और जब हम सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करते है तो किसी जाति वर्ग की बात नहीं करते अपितु सभी के कल्याण की कामना करते है और जब हम सबका मंगल चाहते है तो हमारे आराध्य, महापुरुषों और देवियो जिन्होने अपनी वाणी, विचार और कार्यों से सर्व समाज को सन्देश दिया लेकिन हमने उन्हें जाति समाज तक सीमित कर दिया जिससे समाज में बिखराव हुआ इसीलिए समरसता सेवा संगठन के माध्यम से हमने तय किया कि सभी आराध्य महापुरुषों कि जन्म जयंती को सर्व समाज के साथ मनाएंगे जिससे सब सबको जाने और सब सबको माने के विचार को लेकर समरस समाज कि स्थापना करने का प्रयास प्रारम्भ किया जिससे हमारा भारत समर्थ बन सके।
विचार गोष्टी के पश्चात सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने नर्मदा उद्यान में पौधों का रोपण करने जे विभिन्न समाजों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक जन व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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