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नहीं रहे जबलपुर के धनवंतरी “पद्मश्री” डॉक्टर एमसी डाबर

Jabalpur's Dhanvantari "Padma Shri" Dr MC Dabur is no more

✒️ विलोक पाठक / न्यूज़ इन्वेस्टिगेशन

महज 20 रूपए जैसी मामूली फीस लेकर लोगों का इलाज करने वाले डॉ. एमसी डाबर का आज 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे जरूरतमंद मरीजों के धनवंतरी के रूप में प्रख्यात थे चिकित्सा जगत में महंगे इलाज के दौर में जबलपुर में महज 20 रूपए में मरीजों को राहत देने वाले डॉ. एमसी डाबर ने अपने संपूर्ण जीवन को गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा को समर्पित कर दिया था। मामूली फीस लेकर लोगों का इलाज करने वाले डॉ. डाबर को उनकी नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवाओं के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 16 जनवरी, 1946 को पंजाब, पाकिस्तान में जन्मे डॉ. एम सी डाबर विभाजन के बाद अपने माता-पिता के साथ भारत आ गए। 1967 में, उन्होंने प्रदेश के जबलपुर से एमबीबीएस पूरा किया। उन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना में एक वर्ष तक सेवा भी की है। 1972 से, वह जबलपुर में लोगों को बहुत मामूली शुल्क पर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने में लगे हुए थे। उन्होंने शुरूआत में लोगों का इलाज करने के लिए 2 रुपये चार्ज किए और वर्तमान में वह अपनी फीस के रूप में 20 रुपये ले रहे थे।

डॉक्टर मुनीश्वर चंद्र डावर को पद्मश्री से विभूषित होने पर सम्पूर्ण जबलपुर गौरवान्वित हुआ था। उनके पुत्र शहर के प्रख्यात चिकित्सक ऋषि डाबर उनकी दी हुई शिक्षा और संस्कार का इस समय अनुसरण कर रहे हैं। डॉक्टर डाबर की अतिम यात्रा उनके निज निवास से शाम 4 बजे गुप्तेश्वर मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए शहर के प्रख्यात चिकित्सक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक जताते हुए भगवान से प्रार्थना की है एवं परिजनों को सांत्वना दी है।

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